BUDGET 2021: बैंकिंग सेक्टर में सुधार के लिए बजट में Bad Bank का हो सकता है ऐलान! जानिये क्या है “बैड बैंक”?

आज बैंकिग सेक्टर जिस दौर से गुजर रहा है और एनपीए बढ़ता ही जा रहा है तो ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इसके लिए रोडमैप का ऐलान करे।

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नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच 2020 का साल बैंकिंग सेक्टर के लिए बहुत ही ख़राब साल रहा। सरकार ने अपने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में कई तरह के ऐसे ऐलान भी किये हैं, जिससे बैंकिंक सेक्टर को राहत मिल सके और साथ ही साथ छोटे एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को मौजुदा संकट से उबारा जा सके। तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अपने स्तर से लिक्विडिटी उपायों का ऐलान किया है। पिछले साल फरवरी से लेकर अबतक बैंकिंग सेक्टर के लि करीब 12.7 लाख करोड़ का ऐलान हो चका है लेकिन बावजुद इसके भारतीय बैंकों का एनपीए यानी फंसा हुआ कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इसको राहत देने के लिए काफी समय से सरकार “बैड बैंक” बनाने का विचार कर रही है और उम्मीद है कि इस बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसका ऐलान भी कर दें।

क्या है बैड बैंक?

दरअसल भारतीय बैंकों पर सालों से लगातार एनपीए का दवाब बढ़ता जा रहा है औऱ इस कोरोना काल में तो ये और बढ़ गया। मौजूदा समय की बात करें तो बैंकिंग सेक्टर में कुल एनपीए 8.5 फीसदी है औऱ इसको लेकर आरबीआई ने जो अनुमान लगाया है वो काफी चौंकाने वाला है। आरबीआई के अनुमान के मुताबिक देश में एनपीए मार्च तक बढ़कर साढ़े 12 फीसदी हो सकता है और ऐसा भी हो सकता है कि ये आंकड़ा 14.7 फीसदी तक ना पहुंच जाए। वहीं बैड बैंक एक एग्रीगेटर का काम करता है जो सिस्टम में फंसे संपत्तियों को वापस लाने का काम करता है। बैंकों को इससे ये मदद मिलती है कि वो अपने बिजनस में सामान्य रुप से फोकस कर पाते हैं। अब भारत में ज्यादातर बैंकों पर सरकार का हस्तक्षेप है तो इसलिए सरकार ये आइडिया लेकर आई है।

चूंकि आज बैंकिग सेक्टर जिस दौर से गुजर रहा है और एनपीए बढ़ता ही जा रहा है तो ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इसके लिए रोडमैप का ऐलान करे। हालांकि वित्त मामले के जानकारों का ये भी कहना है कि सरकार बिना आरबीआई की अनुमति या सहमति के बिना ये कदम नहीं उठा सकती। उनका ये भी कहना है कि फंड्स मुहैया कराने के लिए बैंकों के कैपिटल इन्फ्यूजन पर ज्यादा निर्भर रहना और बाद में एनपीए का लगातार बढ़ना पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए आगे भी नुकसान देह बनता रहेगा। रिकैप बॉन्ड्सस की सर्विसिंग को लेकर तो सरकार पर पहले से ही 3 लाख करोड़ का बोझ है और इसकी मैच्योरिटी तक सरकार को 25 हजार करोड़ का व्याज भी भरना है।

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