GST और ऑटो सेल्स से मिले भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत, मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी स्टेबल हुई

PMI आंकड़ों के मुताबिक सुस्त मांग से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के प्रॉडक्शन पर दबाव बना हुआ है। हालांकि बिजनस कॉन्फिडेंस भी ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद PMI सर्वे से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सेहत में सुधार के संकेत मिले हैं।

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File Photo

नई दिल्ली: त्योहार का सीजन शुरु हो चुका है और इस फेस्टिव सीजन में लोगों में खरीदारी की दिलचस्पी बनी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि दिपावली के आते आते लोगों के अंदर ये दिलचस्पी और बढ़ेगी। इसी बीच कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था के सुधरने के संकेत मिल रहे हैं। बात अगर ऑटो सेक्टर की करें तो बीते माह हालांकि बिक्री में गिरावट का सिलसिला तो जारी रहा, लेकिन राहत की बात ये ही कि बिक्री में अगस्त की तुलना में सितंबर में इज़ाफा हुआ है। सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानि PMI 51.4 के साथ इससे पिछले महीने के स्तर पर रहा, लेकिन गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स यानि GST कलेक्शन गिरकर 19 महीने के सबसे निचले स्तर पर चला गया।

ऑटो सेक्टर से मिली राहत की ख़बर

देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी की बिक्री सितंबर में सालाना आधार पर 27.1% गिरकर 110,454 यूनिट पर आ गई, लेकिन यह अगस्त से 18.5% अधिक थी। हांलाकि पिछले महीने श्राद्ध का पखवाड़ा चला, जिसमें हिंदू मान्यताओं के मुताबिक मकान और गाड़ी जैसी बड़ी खरीदारी से परहेज किया जाता है। लेकिन फिर भी कारों की खरीदारी के आंकड़े अगस्त की तुलना में सितंबर में ज्यादा रहा। वही कमर्शल वीइकल कंपनी टाटा मोटर्स का सेल्स वॉल्यूम सालाना आधार पर 45.4% गिरकर 28,079 यूनिट पर आ गया, लेकिन मासिक आधार पर इसमें 28.7% की बढ़ोतरी हुई।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में GST के आंकड़े चौंकाने वाले
ऑटो सेक्टर से तो अच्छी खबर आई लेकिन सितंबर के महीने में जीएसटी का कलेक्शन निराश करने वाला रहा। हालांकि जानकारों का मानना है कि आने वाले वक्त में इसमें भी सुधार होगा। अगस्त महीने में 98,202 करोड़ रुपये जीएसटी का कलेक्शन हुआ, जबकि सितंबर महीने में ये गिरकर 91,916 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि GST कलेक्शन के आंकड़े अगस्त में हुए ट्रांजेक्शंस के हैं, ऐसे में ऑटो सेल्स में मासिक आधार पर हुई बढ़ोतरी से आने वाले समय में इसमें सुधार होगा।

मैन्युफैक्चरिंग में भी सुधार की उम्मीद

PMI आंकड़ों के मुताबिक सुस्त मांग से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के प्रॉडक्शन पर दबाव बना हुआ है। हालांकि बिजनस कॉन्फिडेंस भी ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद PMI सर्वे से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सेहत में सुधार के संकेत मिले हैं। इसे तैयार करने वाली एजेंसी IHS मार्किट ने कहा है कि सरकारी उपायों से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रफ्तार पकड़ सकता है।

सुस्ती के बाद सरकार ने भी उठाये थे जरुरी कदम

जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ छह साल के निचले स्तर 5% पर आ गई थी। इसके बाद सरकार ने आर्थिक रफ्तार तेज करने के लिए कई उपायों का ऐलान किया था। कॉरपोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 22% कर दिया गया, जबकि नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स 15% तय किया गया है।

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