केन्द्र सरकार ने “The Freedom House” की रिपोर्ट को बताया बेबुनियाद, जानिये क्या है इस रिपोर्ट में…

सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि भारत में एक प्रगतिशील लोकतंत्र है, जिसमें अलग-अलग विचारों को रखने वालों के लिए पूरा स्थान है।

0
135

नई दिल्ली: केन्द्र की मोदी सरकार ने “द फ्रीडम हाउस” (The Freedome House) की रिपोर्ट में भारत को स्वतंत्र देशों की सूची से नीचे लाकर आंशिक स्वतंत्र देशों की श्रेणी में रखने को गलत बताया है और साथ ही रिपोर्ट को भ्रामक, बेबुनियाद और गलत बताते हुए अमेरिकी थिंक टैंकों के आकलन का खंडन किया है। सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर सत्तारूढ़ पार्टी से अलग कई राज्यों में दूसरे दलों की सरकारें हैं। एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से देश में चुनाव कराए जाते हैं। केंद्र सरकार सभी नागरिकों के साथ समानता से व्यवहार करती है। केन्द्र सरकार ने सभी मुद्दों का बिंदुवार तरीके से खंडन जारी किया है।

सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि भारत में एक प्रगतिशील लोकतंत्र है, जिसमें अलग-अलग विचारों को रखने वालों के लिए पूरा स्थान है। इस वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र अधिनायकवाद की ओर बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट में दिल्ली दंगों में मुस्लिमों के खिलाफ भीड़ द्वारा की गई हिंसा का जिक्र किया गया है। इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में आलोचकों के खिलाफ राजद्रोह के कानून का भी ज़िक्र किया गया है और कोरोना महामारी (coronavirus pandemic) को नियंत्रण करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित लॉकडाउन के बाद प्रवासी मजदूरों के संकट काल का भी हवाला दिया गया है।

इन्हीं सभी मुद्दों पर जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत सरकार सभी नागरिकों के साथ समानता के साथ व्यवहार करती है, जैसा कि संविधान में कहा गया है और देश में सभी कानून भेदभाव के बिना हर किसी पर लागू होते हैं। कानून-व्यवस्था के मामले में पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन होता है, फिर चाहे कथित तौर पर भड़काने वाले की पहचान कुछ भी हो। 2019 में दिल्ली में हुए दंगा मामले पर जवाब देते हुए केन्द्र सरकार ने कहा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उचित कार्रवाई की गई। सभी शिकायतों या मदद की कॉल पर आवश्यक कानूनी और निरोधी कार्रवाई भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से की गई है।

वहीं दूसरी तरफ राजद्रोह कानून (sedition law) के इस्तेमाल पर सरकार ने कहा है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस राज्यों के विषय हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी उन पर है। अपराधों की जांच का जिम्मा भी उन पर है। ऐसे में कानून प्रवर्तन एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो उचित समझती हैं, वह कार्रवाई करती हैं।