छठ पर्व पर कोरोना का असर, लेकिन लोगों का उत्साह बरकरार

बिहार में इस साल कोरोना की वजह से छठ पूजा पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई है, लेकिन इसके बावजूद न भक्तों के उत्साह में कमी है और न ही पर्व के दिव्य रंगों में कोई कमी है..

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पूर्णियां में छठ के लिए खरीदारी करते लोग...

पूर्णियां: इसबार कोरोना महामारी के बीच बिहार में लोक आस्था का महापर्व छठ मनाया जा रहा है। हालांकि इसको लेकर आए सरकारी गाइडलाइन्स के बाद को इस महापर्व का रंग तो फीका हो गया है लेकिव व्रत करने वाले और लोगों का उत्साह पहले के जैसे ही बरकरार है। हालांकि बाजार में छठ पर्व के सामानों की खरीदारी के लिए भीड़ कम देखने को मिल रहा है। हालांकि व्यापारियों का भी कहना है कि इसबार छठ पर्व पर भी कोरोना का असर दिख रहा है। लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। पूर्णियां शहर की बात करे तो यहां लोग छठ मनाने के लिए पॉलेटेक्निक तालाब, पक्की तालाब, सिटी पुल पर जाया करते थे लेकिन इसबार वहां भीड़ कम देखने को मिल सकती है। लेकिन इससे दूर लोग अपने अपने घर में ही छोटे छोटे घाट का निर्माण करके छठ मनाने की तैयारी में हैं।

नहाय खाय वाले दिन कई जगहों पर सुबह से लोग सरकारी गाइडलाइंस की अनदेखी करके गंगा घाटों पर जुटते दिखे थे। हालांकि ये नजारा भागलपुर और पूर्णियां से सटे मनिहारी के गंगा घाटों पर देखने को मिल रहा था। पूर्णियां के सौरा नदी तट पर भी ऐसा ही कुछ नज़ारा देखने को मिल रहा था। लोग ना तो सोशल डिसटेंसिंग का ही पालन कर रहे थे और ना ही मास्क लगा कर चल रहे थे। चूकि मामला लोक आस्था से जुड़े महापर्व छठ का है तो प्रशासन में इसके लिए नम्र रुख ही अपना रही है। लेकिन ये तो साफ कहा जा सकता है कि छठ पूजा का महापर्व ढलते और उगते सूर्य की उपासना का इकलौता पर्व है। लेकिन इस बार ये पर्व कोरोना महामारी के बीच मनाया जा रहा है तो इसके बाद भी इसकी भव्यता और दिव्य रंग में कहीं कोई कमी नज़र नहीं आ रही है।

पूरे बिहार के सभी जिलों में छठ पर्व को लेकर सुरक्षा के विशेष प्रबंध किये गए हैं। भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए लगभग सभी घाटों के आसपास विशेष सुरक्षाबल तैनात किये गए हैं। जिला प्रशासन ने छठ पूजा को लेकर घाटों पर जाने वाले लोगों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं। साथ ही साथ इस दौरान किसी भी गाड़ी को छठ घाट पर जाने के लिए किसी भी गाड़ी के इजाजत नहीं दी है। सभी श्रद्धालुओं को पैदल ही घाट तक जाना होगा और साथ ही साथ प्रशासन ने आतिशबाजी पर भी रोक लगा दी है।