जितिन प्रसाद के BJP में शामिल होने को लेकर Congress नेता हरीश रावत का बड़ा बयान, कहा – कांग्रेस के मुंह पर बड़ा तमाचा…

रीश रावत ने कहा, "जितिन प्रसाद का भाजपा में शामिल होना हमारे चेहरे पर एक बड़े थप्पड़ की तरह है। यह दुखद और निराशाजनक है।

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नई दिल्ली: कांग्रेस से बीजेपी में जितिन प्रसाद के शामिल होने के बाद अब कांग्रेस के कद्दावर नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी लगी है। इसको लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक बड़ा बयान दे दिया है। हरीश रावत ने कहा है कि जितिन प्रसाद का कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होना कांग्रेस के उपर एक बड़ा तमाचा है। साथ ही उन्होंने इसबात पर भी हैरानी जताई कि कैसे जितिन प्रसाद ने इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी को क्षेत्रिय पार्टी कह दिया।

दरअसल हरीश रावत ने कहा, “जितिन प्रसाद का भाजपा में शामिल होना हमारे चेहरे पर एक बड़े थप्पड़ की तरह है। यह दुखद और निराशाजनक है। मुझे आश्चर्य है कि उन्होंने कांग्रेस को एक क्षेत्रीय पार्टी कहा और उस पार्टी में शामिल हो गए जिसके खिलाफ उनके परिवार ने लड़ाई लड़ी। जिस पार्टी के लिए उनके (जितिन प्रसाद) पिता जी, कांग्रेस के सिपाही के तौर पर हमेशा खड़े रहे, उस पार्टी को छोड़कर बीजेपी में जाना, हैरानी वाली बात है।”

कपिल सिब्बल ने पूछा- यूपी चुनाव में जितिन को ‘प्रसाद’ मिलेगा या…?

वहीं दूसरी तरफ इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘जितिन प्रसाद बीजेपी में हुए शामिल। सवाल यह है कि क्या उन्हें भाजपा से “प्रसाद” मिलेगा या वे यूपी चुनाव के लिए सिर्फ एक ‘पकड़’ हैं? ऐसे सौदों में अगर ‘विचारधारा’ मायने नहीं रखती है तो बदलाव आसान है।”

क्या राजनीति सिद्धांत रहित करियर हो सकती है-शशि थरूर

कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने भी जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल होने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”क्या राजनीति सिद्धांत रहित करियर हो सकती है? राजनीति विचारों के बारे में होनी चाहिए, या यह कुछ भी नहीं है। क्या एक दृढ़ विश्वास वाला व्यक्ति राजनीतिक दलों को बदल सकता है जिस तरह से एक क्रिकेटर आईपीएल टीमों को बदलता है?”

जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए शशि थरूर ने एक कॉलम लिखा है। जो एक अंग्रेजी वेबसाइट में पब्लिश हुई है। शशि थरूर ने लिखा है, ”जितिन प्रसाद का भाजपा में शामिल होने का निर्णय, उनके “बड़े भाई” ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ऐसा ही करने के एक साल बाद किया गया, जो गहरा निराशाजनक है। मैं यह बिना किसी व्यक्तिगत कड़वाहट के कह रहा हूं। दोनों दोस्त थे, दोनों मेरे घर गए हैं और मैं उनके घर गया। मैंने जितिन की शादी में भी गया था। तो यह व्यक्तियों के बारे में नहीं है, या व्यक्तिगत पसंद और नापसंद के बारे में नहीं है। उन्होंने जो किया है उसमें मेरी निराशा कहीं अधिक बड़ी बात पर आधारित है। सिंधिया और जितिन प्रसाद दोनों ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ सबसे मुखर आवाजों में से एक थे और भारत के लिए इसकी सांप्रदायिक कट्टरता के खतरों को उन्होंने आवाद दी। आज, वे दोनों खुशी-खुशी उस पार्टी के रंग खेल रहे हैं, जिसकी वे किसी और से अधिक बार निंदा करते थे।”