क्या Bihar सरकार ने छिपाया था Corona से मौत का आंकड़ा? जारी हुआ नया आंकड़ा…

मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी पटना के 28 प्राइवेट अस्पतालों में जो मौतें हुई है इसका जिक्र इस आंकड़े में किया ही नहीं गया है।

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पटना: क्या बिहार सरकार ने छिपाया था कोरोना से मरने वालों की संख्या का आंकड़ा? अब ये सवाल तब उठने लगे जब बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के कारण होने वाली मौतों का संशोधित आंकड़ा जारी किया। बिहार सरकार ने वुधवार को एक संशोधित सूची जारी की है जिसमें एक दिन के अंदर मौत के आंकड़ों में अचानक े 73 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। जहां पहले बिहार में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5,424 बताया जा रहा था तो वही अब ये आंकड़ा बुधवार को 9,375 तक पहुंच गया। अब मौत के आंकड़ों में अचानक उछाल देखने के बाद तो साफ है कि एक दिन में तो इतनी मौंते हो नहीं सकती। मतलब मौत के आंकड़ों को बिहार सरकार ने छिपाया था।

मामला गर्माया तो इसको लेकर बिहार सरकार ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए बयान जारी कर दिया जिसमें ये कहा गया है कि पटना हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या का ऑडिट किया गया था, जिसमें एक जिले के अंदर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर पाया गया। इस वजह से मौतों की संख्या की सूची में संशोधन किया गया है। इब इसको लेकर बिहार में राजनीति शुरु हो गई। सरकार और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया। नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार और सरकार की मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिये।

नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि “नीतीश जी, इतनी झूठ मत बोलिए और बुलवाइए कि उसके बोझ तले दबने के बाद कभी उठ ना पाएं। जब फँसे तो एकदम से एक दिन में 4000 मौतों की संख्या बढ़ा दी। नीतीश सरकार मौतों का जो आँकड़ा बता रही है उससे 20 गुणा अधिक मौतें हुई है। नीतीश सरकार ही फ़र्जी है तो आँकड़े भी तो फ़र्जी होंगे।” ये बात तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कही है।

हालांकि अभी भी ये माना जा रहा है कि बिहार सरकार का जो ये संशोधित आंकड़ा है उसमें भी काफी झोल है। बताया जा रहा है कि इसमें सिर्फ सरकारी अस्पतालों में जो मौतें हुई हैं बस वो दर्ज है। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के दौरान जिन मरीजों की मौत हुई है उसका कोई जिक्र इस आंकड़े में नहीं किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी पटना के 28 प्राइवेट अस्पतालों में जो मौतें हुई है इसका जिक्र इस आंकड़े में किया ही नहीं गया है। विपक्ष का तो ये भी आरोप है कि जिन मरीजों का दाह संस्कार कोविड प्रोटोक़ल के तहत हुई है या इलाज के दौरान मौत हुई उनका आंकड़ा कहीं ज्यादा है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पटना के 3 बड़े श्मशान घाटों में 3243 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है।