दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग ख़त्म, 11 फरवरी को होगी मतों की गिनती

2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक तरफा जीत हासिल की थी और 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की थी और अरविंद केजरीवाल मुख्य़मंत्री चुने गए थे। वहीं उस चुनाव में बीजेपी को 3 और 15 साल दिल्ली पर राज करने वाली कांग्रेस के हिस्से में एक भी सीट नहीं आई थी।

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Photo: ANI

नई दिल्ली: दिल्ली में शनिवार को हुए 70 सीटों वाली विधान सभा चुनाव के लिए मतदान ख़त्म हो गया। खबर लिखे जाने तक शाम के 6 बजे तक कुल 54.65 फीसदी वोटिंग हो पाई थी। दिल्ली के 11 जिलों में सबसे अधिक 63.14 फीसद मतदान उत्तर पूर्व जिले में रिकार्ड किया गया जबकि सबसे कम 44.29 फीसदी मतदान नई दिल्ली में हुआ। इसबार के चुनाव में दिल्ली की करीब 1.47 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें से 2.08 लाख मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार वोट डाला है। दिल्ली की 1.47 करोड़ मतदाताओं में से 66.8 लाख महिला मतदाताओं ने इसबार अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

इसबार के चुनाव में चुनाव आयोग ने 516 स्थानों और 3,704 मतदान बूथों को संवेदनशील श्रेणी में रखा था और इन स्थानों पर सुरक्षा के मद्देनज़र अर्द्धसैनिक बलो को तैनात किया गया। प्रत्येक पोलिंग बूथ पर वेबकास्टिंग के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। शांकिपूर्ण चुनाव के लिए पुलिस ने लगभग 40,000 सुरक्षाकर्मी, 19,000 होमगार्ड्स और केंद्रीय सैन्य पुलिस बल की 190 कंपनियां तैनात की हैं। इसबार के चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, एलजी अनिल बैजल, मनीष सिसोदिया समेत कई दिग्गजों ने वोट डाला।

इसबार के चुनाव में जहां एक तरफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवील की आम आदमी पार्टी को दोबारा सत्ता में आने की उम्मीद है, वहीं भारतीय जनता पार्टी अपने लिए रास्ता तलाशने की कोशिश में जुटी है। कई राज्यों में सरकार गंवाने वाली बीजेपी के लिए दिल्ली चुनाव काफी अहम है। यही वजह है कि बीजेपी ने भी चुनावी प्रचार में अपना पूरा दमखम दिखाया। 2015 के विधान चुनाव में 67.12 फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं, 2013 के चुनाव में वोट फिसदी 65.63 रहा था। 2008 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में 57.58 फीसदी लोगों ने वोट किया था। 2003 में 53.42 फीसदी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

आपको बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक तरफा जीत हासिल की थी और 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की थी और अरविंद केजरीवाल मुख्य़मंत्री चुने गए थे। वहीं उस चुनाव में बीजेपी को 3 और 15 साल दिल्ली पर राज करने वाली कांग्रेस के हिस्से में एक भी सीट नहीं आई थी। आप को तब 54% वोट मिले थे जो 2017 के नगरपालिका चुनाव में 26% और फिर लोकसभा चुनाव में गिरकर 18% पर आ गए और आम आदमी पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी। 2015 से अबतक भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही अपने वोट प्रतिशत में बढ़त हासिल की है।

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