Farmers Protest: किसान आन्दोलन का चौथा दिन आज, अपनी मांग पर अड़े हैं अलग अलग किसान संगठन…

किसान संगठनों ने गृहमंत्री अमित शाह के अपील को भी ठुकरा दिया है। भारतीय किसान संघ के नेता राकेश टिकैत ने तो सरकार पर तानाशाही तक का आरोप लगा दिया है।

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Photo: ANI

नई दिल्ली: मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि बिल (Farms Act) खिलाफ के किसानों के आंदोलन का रविवार को चौथा दिन है। सरकार के समझाने बुझाने के बाद भी किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। पहले पंजाब और हरियाणा के किसान लेकिन अब उत्तरप्रदेश के किसान संगठनों का साथ इस आंदोलन को मिल रहा है। किसान अभी भी दिल्ली-हरियाणा की सीमा सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। कुछ किसान दिल्ली के निराकारी समागम मैदान में पहले से ही मौजूद हैं। शनिवार को किसानों ने तय किया है कि वे अभी सिंधु बॉर्डर पर ही प्रदर्शन करेंगे और बुराड़ी के निराकारी समागम मैदान में नहीं जाएंगे।

वहीं दूसरी तरफ किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का भी कहना है कि वो बॉर्डर पर ही रह कर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बुराड़ी के समागम मैदान में जाने से साफ इंकार कर दिया है। इस वक्त राकेश टिकैत के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश के किसान दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर रुके हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता और प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि प्रदर्शन तो आजतक रामलीला मैदान में ही होता आया है, तो हमें निरंकारी मैदान क्यों भेजा जा रहा है, जो कि एक निजी संस्था है। राकेश टिकैत ने साफ साफ कहा है कि हमलोग आज यहीं (दिल्ली-गाज़ियाबाद बॉर्डर) पर रहेंगे।

किसानों के समर्थन में आई मायावती

उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में आ गई हैं। उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा कृषि से सम्बन्धित हाल में लागू किए गए तीन कानूनों को लेकर अपनी असहमति जताते हुए पूरे देश में किसान काफी आक्रोशित और आन्दोलित भी हैं। इसके मद्देनजर, किसानों की आम सहमति के बिना बनाए गए, इन कानूनों पर केन्द्र सरकार अगर पुनर्विचार कर ले तो बेहतर।

गृहमंत्री अमित शाह की अपील को भी ठुकराया

किसान अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं। यहां तक की उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव पर किसानों ने फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया है। शनिवार को अमित शाह ने किसानों से कहा था कि अगर किसान बुराड़ी ग्राउंड में जाते हैं तो सरकार उनसे तुरंत बात करेगी।लेकिन भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत गृह मंत्री की इस शर्त पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार उनपर पर दबाव डालने की कोशिश कर रही है। राकेश टिकैत ने कहा कि ये गुंडागर्दी वाली बात है क्या…कि वहां पर आओगे तभी बात होगी। राकेश टिकैत ने कहा कि आखिर किसान यहां क्यों आए हैं, क्योंकि उन्हें समस्या है, कभी यहां आए हैं। हम चाहते हैं कि सरकार बात करे।

दरअसल गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा था कि अगर किसान चाहते हैं कि भारत सरकार जल्द बात करे, 3 दिसंबर से पहले बात करे, तो मेरा आपको आश्वासन है कि जैसी ही आप निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित हो जाते हैं, उसके दूसरे ही दिन भारत सरकार आपकी समस्याओं और मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है।