Bihar: “देश बेंचू आदमखोर, मोदी-शाह गद्दी छोड़ो” नारे के साथ किसानों ने मनाया काला दिवस, राजनीतिक पार्टियों का भी मिला समर्थन…

बेतिया में मनाये जा काला दिवस को कई राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन मिला है। कई दल के नेता संयुक्त रुप से सड़कों पर उतरे और आन्दोलन को अपना समर्थन दिया।

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बेतिया: तीन कृषि कानूनों को लेकर वुधवार यानि 26 मई को किसानों ने काला दिवस मनाया। 6 महीने बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा किसान आन्दोलन के प्रति नकारात्मक रूख और हठधर्मिता के खिलाफ बेतिया में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर पश्चिम चंपारण जिले के कई गांवों में किसान महासभा के नेतृत्व में धरना, प्रदर्शन कर काला दिवस मनाया। इस धरना प्रदर्शन को यहां भी कई राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिला।

इस मौके पर किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोरोना संकट को अवसर में बदलने का नारा देकर लाभवाली सरकारी संस्थानों का निजीकरण किया और फिर खेती को भी अंबानी अडानी के हाथों गिरवी रख दिया। जिसका विरोध देश के किसान पिछले 6 महीने से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठकर कर रहे हैं, लेकिन इनकी माँगो पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों से इस्तीफे की मांग की। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि किसानों की आय दूगना करने की बात करते हुए कृषि लागत को ही कई गुना ज्यादा बढाते जा रहे हैं।

लॉकडाउन को लेकर भी सरकार पर साधा निशाना

उन्होंने डाक्टरों, दिल्ली उच्च न्यायालय और अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया का हवाला देते हुए कहा है कि सबने ऑक्सीजन की कमी और लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाते हुए धार्मिक जमावड़ों, चुनावी रैलियो के लिए सीधे प्रधानमंत्री को जिम्मेवार ठहराया है। इतना ही नहीं, उनलोगों ने डाक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और आमजनों की हो रही मौतों को जनसंहार की संज्ञा दी है और सच्चाई ये है कि कोरोना काल मे हो रही मौत पूरी तरह से सरकार की विफलता है।

“C2 के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो

वही जोखू चौधरी ने कहा कि दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का 6 माह पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों को बिना शर्त रद्द करें और C2 के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए।ब टाईदार किसानों को पहचान पत्र देते हुए सरकारी सहायता दिया जाए। आपको बता दें कि इस मौके पर विनोद कुशवाहा, बिंदा लाल प्रसाद, जितेंद्र शाह,सूरज पटेल आदि मौजूद थे।

राजनीतिक दलों का भी मिला समर्थन

बेतिया में मनाये जा काला दिवस को कई राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन मिला है। कई दल के नेता संयुक्त रुप से सड़कों पर उतरे और आन्दोलन को अपना समर्थन दिया। उनका कहना है कि आज कोरोना से देश के लोग मर रहे हैं। किसान विरोधी नीतियों के कारण दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे। 400 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं। कर्ज से दबे हुए हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री आरएसएस के साथ पिछले तीन दिनों से 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव के मंथन में मशगूल हैं। सरकार को मरते हुए लोगों की कोई परवाह नहीं है।

इधर संयुक्त किसान मोर्चा किसान विरोधी तीनों काले कानूनों की वापसी, एमएसपी को कानूनी दर्जा देने, कोरोना काल में सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन,  वेक्सिन और कोरोना से बचाव के लिए तमाम दवाओं को उपलब्ध कराने,  प्रत्येक गरीब परिवार को साढ़े सात हजार रुपए की विशेष सहायता देने,  10 किलो प्रति व्यक्ति अनाज देने,  सभी गरीबों को मनरेगा के माध्यम से ₹600 की मजदूरी पर काम देने आदि के सवाल पर काला दिवस मना रही है। इसके साथ साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकत्ताओं ने मोदी सरकार के सत्तालोलुप और जन विरोधी कारवाई के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और किसानों की मांगों को अविलंब पूरा करने का सरकार से मांग किया।

आपतो बता दें कि इस कार्यक्रम में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पश्चिम चंपारण जिला के मंत्री प्रभुराज नारायण राव,  राजद के बेतिया नगर अध्यक्ष अमजद साहब , युवा राजद नेता मुकेश यादव , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला नेता अंजारुल ,  कांग्रेस पार्टी के जिला नेता कलाम जौहरी तथा माकपा जिला सचिवमंडल सदस्य चांदसी प्रसाद यादव , प्रभुनाथ गुप्ता , शंकर कुमार राव,  म. हनीफ, नीरज बरनवाल, अवध बिहारी प्रसाद, प्रकाश वर्मा आदि जिला नेतृत्व के साथी शामिल थे।