Special Story: एकबार फिर अफगानिस्तान में तालिबान का राज, भारत को भी पहुंच सकता है नुकसान…

पिछले कुछ हफ्तों में तालिबान ने अफगानिस्तान पर काफी हद तक कब्जा कर लिया है और ये काम तालिबान की तरफ से लगातार चल रहा है।

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अफगानिस्तान…जहां से अभी अमेरिकी सेना निकली भी नहीं थी कि तालिबान एक बार फिर देश पर कब्जा करने के लिए सक्रिय हो गया है। ऐसा लग रहा है मानों अफगानिस्तान की सेना भी तालिबान के सामने घुटने टेकते नज़र आ रही है। कई जगहों पर तो सेना ने अपने हथियार डाल दिये और अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए छुपते छुपाते आसपास के देशों में निकल गये। पिछले कुछ हफ्तों में तालिबान ने अफगानिस्तान पर काफी हद तक कब्जा कर लिया है और ये काम तालिबान की तरफ से लगातार चल रहा है। अफगानिस्तान के 398 जिलों में से 193 ज़िलों पर तालिबान अबतक कब्जा कर चुका है। 130 जिलों पर अफगानिस्तान और तालिबान के बीच झड़प चल रही है। सिर्फ 75 जिले ही ऐसे हैं जहां अफगानिस्तान सरकार का नियंत्रण है।

तालिबानी कब्जे का भारत पर बुरा असर

अफगानिस्तान की स्थिति लगातार गंभीर बनती जा रही है। यह कहना कोई बड़ी बात नहीं है कि आज जो हालात देखने को मिल रहे हैं तो कुछ समय बाद अब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार होगी। हालांकि आज से 20 साल पहले तालिबान इतना मजबूत नहीं था, जितना आज होता जा रहा है। अफगानिस्तान मामलों के जानकार तो ये भी कह रहे हैं कि अफगानिस्तान से अमेरिका के चले जाने के बाद से ही तालिबान और ज्यादा सक्रिय और शक्तिशाली हो गया है। भारत की नज़र से देखा जाए तो अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से भारत को भी काफी नुकसान पहुंच सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि भारत के कई प्रोजेक्ट्स अभी अफगानिस्तान में चल रहे हैं।

कांधार कांड में तालिबान ने की थी पाकिस्तान की मदद

1999 के गांधार हाईजैक कांड आप अबतक नहीं भूले होंगे। इस कांड में तालिबान ने मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए पाकिस्तान की मदद की थी और इंडियन एयरलाइन्स का विमान हाईजैक कर कांधार में उतरवाया था। क्योंकि उस समय पाकिस्तान को सबसे सुरक्षित जगह कंधार ही दिखी क्योंकि तालिबान पाकिस्तानी आतंकियों की मदद कर रहा था। हाल ही में तालिबान के आतंकी ने भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की भी हत्या कर दी है। दानिश एक फोटो जर्नलिस्ट थे और 2010 से वह अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी राउटर में काम कर रहे थे। दानिश सिद्दीकी अफगानिस्तान में चल रहे तालेबान के घमासान पर मीडिया कवरेज कर रहे थे और इसी मुठभेड़ में दानिश सिद्दीकी की बेरहमी से हत्या कर दी गई।

हमारे पड़ोसी देश अफगानिस्तान में जिस तरह से समीकरण पल पल बदल रहा है, उसको देखकर तो यही लगता है कि कुछ ही समय में पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होगा जो हमारे देश के लिए नुकसानदेह होगा। हालांकि इसके साइड इफेक्ट्स क्या होंगे, अभी ये कह पाना थोड़ी जल्दबाजी होगी लेकिन कहीं ना कहीं इस बात का भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि अफगानिस्तान में एकबार तालिबान के सक्रिय होने पर कहीं ना कहीं पाकिस्तानी आतंकियों को भी बल मिलेगा। अब देखना ये है कि क्या एकबार फिर अमेरिका इसमें अफगानिस्तान की मदद करता है?