Bihar: किसान सभा का सरकार पर आरोप, किसानों को नहीं मिल रहा गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये…

बिहार के किसानों को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दाम नहीं मिल रहा है। सीमांत और मझौले किसानों को 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं बेचना पड़ रहा है।

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बेतिया: बिहार राज्य किसान सभा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि बिहार के किसानों को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दाम नहीं मिल रहा है। सीमांत और मझौले किसानों को 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं बेचना पड़ रहा है। किसानों के पास इसबात की मजबूरी है कि किसान ज्यादा समय तक गेहूं बेचे बिना नहीं रह सकते। क्योंकि उनके महाजन के कर्जे, दवा, बीज, खाद आदि के लिए फसल के पैसे पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में किसानों को जो भी दाम मिलता है उसपर ही अनाज बेचने पर मजबूर होना पड़ता है।

किसान महासभा के संयुक्त महासचिव प्रभुराज नारायण राव ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि किसानों को गेहूं का न्यूनतम मूल्य नहीं मिल रहा है। गेहूं की खेती किसानो के लिए घाटे का सौदा हो गया है। ऐसी स्थिति में सरकार के द्वारा डीएपी खाद शहीद तमाम खातों का दाम बढ़ा देना, कृषि औजारों से अनुदान हटा कर खेती को महंगी बनाने की भूमिका केंद्र और बिहार सरकार की सोची समझी साजिश है। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में ही बिहार राज्य किसान सभा ने कहा था कि 15 अप्रैल से गांव गांव में क्रय केंद्र लगाकर किसानों का गेहूं खरीदा जाए। लेकिन पिछले सालों की तरह इस साल भी छोटे और सीमांत किसानों , मझोले किसानों को लाभ पहुंचाने कि सरकार के पास कोई योजना नहीं है।

केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है कि गेहूं की खेती में घाटा दिखला कर किसान हित में नहीं बतला कर मोदी सरकार सभी खेतों को कारपोरेट के हाथों दे देना चाहती है। जो कल कारखानों, खदानों और उद्योगों से निकले हुए सामानों पर मनमाने दाम रखकर बेचने की नीति के द्वारा कारपोरेट घराना खेतों का व्यवसायीकरण कर मनमाने तरीके से अनाज के दामों में वृद्धि कर देश की जनता को लूटेंगे । आज इसी रास्ते पर मोदी और नीतीश सरकार चल रही है।

उनका ये भी कहना है कि मोदी सरकार एमएसपी को कानूनी दर्जा नहीं देना चाहती औऱ साथ ही वो स्वामीनाथन कमीशन के अनुशंसाओं को लागू करना नहीं चाहती। बल्कि अनाज की खरीदारी से सरकार को मुक्त कर पीडीएस यानी राशन प्रणाली व्यवस्था जिसके माध्यम से देश के गरीबों को खाने को गेहूं चावल मिलता है। उस पूरी व्यवस्था को समाप्त कर देना चाहती है। जो किसी भी स्थिति में भारत जैसे गरीब देश की जनता के हित में नहीं है । ऐसी स्थिति में देश में चल रहे किसान आंदोलन को मजबूती प्रदान करने की जरूरत है।