Economic Survey संसद में पेश, 2020-21 में GDP ग्रोथ 6 से 6.5 % रहने का अनुमान, 6 साल में 2.62 करोड़ लोगों को मिली नौकरी

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 5 फीसदी पर रखा है। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राजकोषीय ग्रोथ 5 फीसदी रहने का अनुमान है।

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2019-2020 का आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश कर दिया है। पेश हुए इस सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई अहम आंकड़े संसद में पेश किये गए। इसके मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में GDP ग्रोथ रेट 6-6.5 फीसदी के बीच रहेगी। जीडीपी ग्रोथ रेट को लेकर सरकार का ये अनुमान चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 0.5 से 1 फीसदी तक अधिक है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 5 फीसदी पर रखा है। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राजकोषीय ग्रोथ 5 फीसदी रहने का अनुमान है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष  2020-2025 के बीच सरकार इंफ्रा सेक्‍टर में 102 लाख करोड़ का निवेश करेगी।

इस सर्वे रिपोर्ट में इस बात की सलाह दी गई है कि अगले तीन साल में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी 100 लाख करोड़ के निवेश की जरुरत है ताकि इकोनॉमी की ग्रोथ में यह बाधा न बने। औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक यानी IIP में साल 2017-18 में 4.4 प्रतिशत की तुलना में साल 2018-19 में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मौजूदा वर्ष 2019-20 (अप्रैल-नवम्‍बर) के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि में 5 फीसदी की तुलना में आईआईपी में महज 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। साल 2018-19 के दौरान भारतीय रेलवे ने 120 करोड़ टन माल ढुलाई की और यह चौथा सबसे बड़ा माल वाहक बना। इसी तरह रेलवे 840 करोड़ यात्रियों की बदौलत दुनिया का सबसे बड़ा यात्री वाहक बना है।

वही नौकरी की बात करें तो इस सर्वे के मुताबिक साल 2011-12 से 2017-18 के 6 साल के दौरान 2.62 करोड़ लोगों को नई नौकरी मिली है। सर्वे के मुताबिक वर्ष 2011-12  से 2017-18  के बीच देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में 2.62 करोड़ लोगों को नौकरियां मिली हैं। आपको बता दें कि ये आंकड़ा संगठित क्षेत्र का है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, नवंबर 2019 तक कुल 69.03 लाख लोगों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रश‍िक्ष‍ित किया गया है। यही नहीं, इन 6 साल के दौरान महिलाओं के रोजगार में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सर्वे के मुताबिक रोजगार के मामले में सरकार का फोकस इस बात पर रहा है कि नौकरियों की गुणवत्ता में सुधार हो और अर्थव्यवस्था में संगठित क्षेत्र की नौकरियां बढ़े।

इसी के तहत रेगुलर वेज या सैलरी वाले कर्मचारियों का हिस्स साल 2010-11 के 18 फीसदी के मुकाबले 2017-18 में बढ़कर 23 फीसदी तक पहुंच गया। इस दौरान कुल मिलाकर 2.62 करोड़ नई नौकरियां दी गईं। इसमें से1.21 करोड़ नौकरियां ग्रामीण क्षेत्र में और 1.39 करोड़ नौकरियां शहरी क्षेत्र में दी गईं।

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