वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया देश का “बही-खाता”, टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव, LIC में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

वित्तमंत्री ने करीब 2 घंटे 40 मिनट तक बजट भाषण पढ़ा। ये भारत के इतिहास का अबतक का सबसे लंबा बजट भाषण था। अपने बजट भाषण के दौरान वित्तमंत्री ने कहा कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

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नई दिल्ली: देश की पहली महिला वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना दूसरा बजट पेश किया। ये भारत के इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण था। वित्तमंत्री ने करीब 2 घंटे 40 मिनट तक बजट भाषण पढ़ा। ये भारत के इतिहास का अबतक का सबसे लंबा बजट भाषण था। अपने बजट भाषण के दौरान वित्तमंत्री ने कहा कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और केंद्र सरकार का कर्ज घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 48.7 प्रतिशत पर आ गया है। यह मार्च, 2014 में 52.2 प्रतिशत था। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि 2014-19 के दौरान औसत वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत से अधिक रही। इस दौरान औसत मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत रही।

सीतारमण ने अपने बजट भाषण कई कल्याण योजनाओं मसलन सस्ता घर, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और आयुष्मान भारत का जिक्र किया। वित्तमंत्री ने करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए कर कानूनों को सरल बनाने के लिए नयी वैकल्पिक व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था पेश की है। इसके तहत 2.5 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त रहेगी। 2.5 से पांच लाख तक की आय पर पांच प्रतिशत की दर से कर लगेगा, लेकिन 12,500 रुपये की छूट बने रहने से इस सीमा तक की आय पर कर नहीं लगेगा। पांच से साढ़े सात लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत, साढ़े सात से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत, 10-12.5 लाख रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत और 12.5 से 15 लाख रुपये तक की आय पर 25 प्रतिशत की दर से आयकर का प्रस्ताव है। पंद्रह लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगेगा।

सरकार ने अपने विनिवेश कार्यक्रम के तहत देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में अपनी कुछ हिस्सेदारी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ निकाल कर बेचने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि एलआईसी को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराया जाएगा। इसकी बात करते हुए उन्होंने कहा कि सूचीबद्धता से कंपनियों में वित्तीय अनुशासन बढ़ता है। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का आईपीओ के जरिये एलआईसी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। आपको बता दें कि अभी एलआईसी की पूरी हिस्सेदारी सरकार के पास है।