महाराष्ट्र के औरंगाबाद में बड़ा हादसा, ट्रैक पर सो रहे प्रवासी मजदूरों को ट्रेन ने कुचला, 16 की मौत

ये हादसा सुबह के करीब 5:15 बजे एक मालगाड़ी वहां से गुजरी। मजदूरों को संभलने का भी मौका नहीं मिला और सभी ट्रेन की चपेट में आ गए। रेलवे के अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि की है।

0
232
Photo: ANI

औरंगाबाद: महाराष्ट्र में शुक्रवार की सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास 16 प्रवासी मजदूर एक मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। ये घटना मुंबई से करीब 360 किलोमीटर दूर औरंगाबाद जिला स्थित करमाड की है। सभी मजदूर पटरी के सहारे जालना से भुसावल की ओर पैदल अपने घर लौट रहे थे। थकान की वजह से सभी मजदूर पटरी पर ही लेट गए। सुबह के करीब 5:15 बजे एक मालगाड़ी वहां से गुजरी। मजदूरों को संभलने का भी मौका नहीं मिला और सभी ट्रेन की चपेट में आ गए। रेलवे के अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि की है। इस घटना के मद्देनजर रेलवे ने जांच के आदेश दे दिये हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। फिलहाल अभी तक मजदूरों की शिनाख्त नहीं हो पाई है।

मिली जानकारी के मुताबिक ये हादसा इतना दर्दनाक था कि घटना के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। बताया जा रहा है कि ट्रैक पर मजदूरों को देखने के बाद लोको पायलट ने अपने हद तक मालगाड़ी को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन फिर भी समय पर ट्रेन नहीं रुक पाई और फिर हादसे के शिकार 16 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 5 मजदूर घायल हो गए। सभी घायल मजदूरों का इलाज औरंगाबाद के सरकारी अस्पताल में चल रहा है। औरंगाबाद में हुई इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल हादसे में जानमाल के नुकसान से बेहद दुखी हूं। रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल से बात कर चुका हूं और वह स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। हर संभव मदद दी जा रही है।”

वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस घटना पर दुख जताया और सरकार पर बरसे। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “मालगाड़ी से कुचले जाने से मजदूर भाई-बहनों के मारे जाने की ख़बर से स्तब्ध हूं। हमें अपने राष्ट्र निर्माणकर्ताओं के साथ किये जा रहे व्यवहार पर शर्म आनी चाहिए। मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”

आपको बता दें कि कई राज्यों ने दूसरे राज्यों में अपने-अपने राज्यों के मजदूरों, कामगारों, तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों के वापस अपने राज्य में लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। ये ट्रेन एक स्वास्थ्य मानकों पर खरे उतरे यात्रियों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के लिए चल रही है। राज्य सरकारों ने केन्द्र के साथ मिलकर ट्रेन चलवा रही है जिसका 15 फीसदी खर्च राज्य सरकार और 85 फीसदी खर्च केन्द्र सरकार दे रही है। लेकिन इसके बावजूद लोगों के अपने राज्य पैदल जाने का सिलसिला नहीं थम रहा है। काफी संख्या में लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर पैदल भी अपने राज्य लौट रहे हैं। लेकिन इस बीच दुखद ख़बर ये भी आती जा रही है कि कई मजदूर अपनी मंजिल पर भी नहीं पहुंच पाए और रास्ते में ही दम तोड़ दिया तो कई लोग अपने गन्तव्य पर पहुंच कर दम तोड़ दिया।