7 साल के संघर्ष के बाद निर्भया का मिला इंसाफ, फांसी पर लटके सभी चारों दोषी, गिड़गिड़ा रहे थे दोषी

गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनावाई हुई लेकिन कोर्ट ने सुनवाई के याचिका को ठुकरा दिया था, उसके बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन यहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

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नई दिल्ली:  सात साल से ज्यादे वक्त के इंतजार के बाद निर्भया मामले के सभी दोषियों विनय शर्मा, पवन गुप्ता, मुकेश सिंह और अक्षय कुमार को शुक्रवार तड़के साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। फांसी से बचने के लिए आरोपियों के वकील ने गुरुवार की रात को भी कई पैतरें अपनाएं। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनावाई हुई लेकिन कोर्ट ने सुनवाई के याचिका को ठुकरा दिया था, उसके बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन यहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और शुक्रवार तड़के सभी दोषियों को फांसी दे दी गई। मिली जानकारी के मुताबिक जब सभी आरोपियों को फांसी के लिए ले जाया जा रहा थी तो सभी आरोपियों के चेहरे पर तनाव साफ देखा जा रहा था। फांसी से बचने के लिए वो गिड़गिड़ा रहे थे।

मिली जानकारी के मुताबिक चारों दोषियों को फांसी के लिए सुबह 3.15 बजे जगा दिया गया था हालांकि फांसी की जानकारी के बाद सभी दोषी रातभर सो नहीं पाए थे। सभी दोषियों को सुबह के 4 बजे चाय पीने के लिए दी गई थी लेकिन सभी ने चाय पीने से इंकार कर दिया। फिर नाश्ता के लिये पूछा गया तो सभी ने नाश्ता करने से भी इंकार कर दिया। फिर सभी दोषियों को काला कपड़ा पहनने के लिए दिया गया और फिर पवन जल्लाद ने सभी के हाथ पीछे से बांध दिये। बताया जा रहा है कि जैसे ही चारों को फांसी घर की तरफ ले जाया जा रहा था तो चारों जमीन पर लेट कर रोने लगे और सभी माफी मांगने लगे। चारों दोषी आखिरी समय से जेल अधिकारियों से गुहार लगाते रहे लेकिन सभी को आगे लाकर फांसी के तख्ते पर खड़ा कर दिया गया। इसके बाद चारों के गले में फंदा डाल दिया गया। जैसे ही जेल सुपरिटेंडेंट ने इशारा किया जल्लाद ने लिवर खींच दिया।

जब दोषियों को फांसी के लिए ले जाया जाने लगा तो उससे पहले सभी को नहाने और कपड़े बदलने के लिए कहा गया लेकिन विनय ने नहाने और कपड़े बदलने से इंकार कर दिया। वो पुलिस के सामने खूब रोया, गिड़गिड़ाने लगा और अपने गुनाह की माफी मांगने लगा। उसे फांसी घर ले जाया गया तो वह लेट गया और आगे जाने से मना करने लगा था। काफी कोशिशों के बाद उसे आगे लेकर जाया गया। सेल से बाहर लाकर फांसी कोठी से ठीक पहले चारों के चेहरे काले कपड़े से ढक दिए गए। वहीं इनके दोनों पैर भी बांध दिए गए थे।