50-50 फॉर्मूले पर बीजेपी शिवसेना आमने सामने, फडणवीस ने कहा – बीजेपी ने 50-50 का वादा नहीं किया

शिवसेना ने दावा किया है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि विधानसभा चुनाव में 50-50 फॉर्मूले को लागू किया जाएगा।

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मुंबई: महाराष्ट्र में किसकी होगी सरकार, इसपर अभी तक तकरार बरकरार है। 50-50 फॉर्मूले पर ना तो बीजेपी झुकने को तैयार है और ना ही शिवसेना। इसी बीच नई सरकार के गठन को लेकर बीजेपी ने भी शिवसेना को दो टूक कह दिया है कि महाराष्ट्र में अगर किसी की सरकार बनेगी तो बीजेपी की ही सरकार बनेगी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने साफ साफ कह दिया है, “हमने शिवसेना से कभी भी ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद का वादा नहीं किया था। मैं 5 साल के लिए मुख्यमंत्री रहूंगा।” लेकिन शिवसेना का दावा है कि लोकसभा चुनाव से पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच हुई बैठक में इस बात पर सहमती बनी थी कि ढाई साल के लिए महाराष्ट्र में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा और अगले ढाई साल के लिए शिवसेना का।

शिवसेना ने दावा किया है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि विधानसभा चुनाव में 50-50 फॉर्मूले को लागू किया जाएगा। 50-50 फॉर्मूले का मतलब है कि सरकार के 5 साल के कार्यकाल में ढाई साल – ढाई साल के लिए दोनों पार्टियों के मुख्यमंत्री होंगे। शिवसैनिकों की मांग है कि 50-50 फॉर्मूले के तहत पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने और जीतने वाले उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पहले ढाई साल के मुख्यमंत्री बनाया जाय औऱ फिर अगले ढाई साल के बीजेपी की तरफ से देवेन्द्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया जाय।

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी शिवसेना के बीच गठबंधन होने के बावजूद महाराष्ट्र में सरकार बनाने में विलंब होने के बारे में पूछने पर शिवसेना के संजय राउत ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में हों।’’ राउत ने सोमवार को कहा था कि उनकी पार्टी को महाराष्ट्र में अगली सरकार बनाने के  लिए विकल्प खोजने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। संजय राउत ने ये भी कहा, ‘‘राजनीति में कोई संत नहीं हैं।’’ उन्होंने दावा किया था दोनों पार्टियां सत्ता में समान भागीदारी के फॉर्मूले पर सहमत थीं और मुंबई में तो इस बारे में घोषणा भी कर दी गई थी।

आपको बता दें कि 21 अक्टूबर को हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी के विधायकों की संख्या 2014 की तुलना में घट गई है और उसके बाद से ही शिवसेना सत्ता में बराबर की भागीदारी पर जोर दे रही है। महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। शरद पवार की एनसीपी ने 54 सीट जीतीं, जबकि कांग्रेस के हिस्से 44 सीट आई हैं। 24 अक्टूबर को चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के तबकों की ओर से ऐसे संकेत मिलते रहे हैं कि राज्य में बीजेपी से परे सरकार गठन का शिवसेना का कदम हकीकत में बदल सकता है। हालांकि, कांग्रेस-एनसीपी की तरफ से इसके बारे में अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

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