संसद में पेश हुआ नागरिकता संशोधन बिल, पक्ष में 293 और विरोध में 82 वोट पड़े, पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी

राज्यसभा में बिल को पास कराने के लिए सरकार को पसीना बहाना पड़ सकता है। राज्यसभा में सरकार के साथ 123 सांसदों का समर्थन है जबकि विरोध में 106 सांसद है, इसके अलावा 11 सांसदों को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है।

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नई दिल्ली: गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में मोदी सरकार एक और महत्वाकांक्षी बिल नागरिक संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। जो लोकसभा में पास हो गया है और अब इस बिल को पास कराने के लिए राज्यसभा में भेजा जाएगा। लोकसभा में इस बिल के क्ष में 293 वोट पड़े तो विरोध में 82 वोट पड़े। हालांकि अधिकतर विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं।  कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस बिल के जरिए केंद्र सरकार देश के मुसलमानों पर निशाना साध रही है। नागरिकता संशोधन विधेयक दूसरे देशों से भारत में रह रहे गैर मुस्लिम लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए है। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पेश करने के दौरान साफ लफ्जों में ये कह दिया है कि ये बिलकहीं से भी भारत के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।

आपको बता दें कि ये बिल नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए पेश किया गया है। इस संशोधन के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान किया जा रहा है। बिल के तहत हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है जबकि मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता नहीं मिलेगी। बिल में 11 साल के बजाय 6 साल भारत गुजारने पर भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान दिया गया है, नागरिकता के लिए बेस ईयर को 1971 से हटाकर 2014 किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है।

असम, मेघालय समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में फिलहाल विरोद किये जा रहे हैं। खासतौर से नागरिकता के लिए बेस ईयर 1971 से बढ़ा कर 2014 का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। भाजपा की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद भी कह रही है कि यह बिल 1985 के असम समझौते के खिलाफ है। असम समझौते में 1971 के बाद आने वाले शरणार्थी अवैध हैं। संशोधित बिल में उत्तर-पूर्व के राज्यों को खास अधिकार दिए जा सकते हैं, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम को बिल से अलग रखा जा सकता है।

आपको ये भी बता दें कि लोकसभा में सरकार के पास जो संख्या बल है उससे तो पहले से ही लग रहा है कि बिल आसानी से पास हो जाएगा, लेकिन राज्यसभा में बिल को पास कराने के लिए सरकार को पसीना बहाना पड़ सकता है। राज्यसभा में सरकार के साथ 123 सांसदों का समर्थन है जबकि विरोध में 106 सांसद है, इसके अलावा 11 सांसदों को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है।

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