कांग्रेस और एनसीपी में ज़ुबानी जंग तेज, कांग्रेस बोली- एनसीपी जैसी सहयोगी हो तो दुश्मन की जरूरत नहीं

एनसीपी नेता का ये बयान तब आया जब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजन भौंसने ने ये कह डाला था कि, " आपको वास्तव में दुशमन की जरुरत नहीं बै जब आपके पास एनसीपी जैसे सहयोगी हों।"

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File Photo

मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा के नतीजों के ऐलान से पहले ही कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टी एनसीपी के बीच ज़ुबानी जंग तेज हो गई है। एग्जिट पोल में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन के जीत के संभावना के बाद से ही दोनों पार्टियों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दोनों पार्टियां खामियों का दोष एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं। एनसीपी नेता और राज्यसभा सांसद मजीद मेमन ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, ”सोनिया गांधी और उनकी बेटी प्रियंका गांधी चुनाव प्रचार से दूर रहीं। राहुल गांधी आए लेकिन कांग्रेस के अपने नेता उनकी जनसभाओं के दौरान उनके साथ नहीं दिखे। केवल एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने चुनाव प्रचार के दौरान कड़ी मेहनत की।”

मेमन ने यहां तक कह डाला कि इसबार के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ एनसीपी का गठबंधन बस एक मजबूरी थी क्योंकि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने का हालत में नहीं थी। दरअसल एनसीपी नेता का ये बयान तब आया जब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजन भौंसने ने ये कह डाला था कि, ” आपको वास्तव में दुशमन की जरुरत नहीं बै जब आपके पास एनसीपी जैसे सहयोगी हों।” एनसीपी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए भोंसले ने पूछा था कि ”शरद पवार को छोड़कर, आपने राज्य भर में एनसीपी के किसी अन्य नेता को नहीं देखा। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करने के बावजूद, एक 80 साल के व्यक्ति को सार्वजनिक बैठकें करने के लिए राज्य भर में यात्रा करनी पड़ी।”

हालांकि दोनों पार्टियों के नेताओं की टिप्पणी के बाद कांग्रेस-एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करने की भी कोशिश की और उनके बयानों को खारिज करते दिखे। लेकिन दोनों तरफ आरोप प्रत्यारोप के इस दौर को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि एक्जिट पोल जैसे नतीजे ही अगर 24 अक्टूबर को आया तो ये सिलसिला आगे और भी बढ़ सकता है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले गए थे और इसका नतीजा 24 अक्टूबर को आएगा।

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