पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का दिल का दौरा पड़ने से निधन, 87 वर्ष की उम्र में चेन्नई में ली आखिरी सांस

टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले 1989 में भारत के 18 वें कैबिनेट सेक्रेटरी के पद पर भी तैनात रह चुके हैं। 1997 में शेषन ने राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था लेकिन के आर नारायण से हार गए।

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चेन्नई: भारत में चुनाव के नियमों को बहुत ही कड़ाई से लागू करवाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का 87 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने चेन्नई में अंतिम सांस ली। उनका पूरा नाम तिरुनेलै नारायण अइयर शेषन था। टी एन शेषन देश के दसवें मुख्य चुनाव आयुक्त थे। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने ट्वीट कर टीएन शेषन के निधन की जानकारी दी। एसवाई कुरैशी ने उन्हें याद करते हुए लिखा, “वह सच्चे अर्थों में महान थे। मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। टीएन शेषन ने रविवार को चेन्नई में रात करीब 9:30 बजे अंतिम सांस ली।”

टीएन शेषन के बारे में ये काफी लोकप्रिय है कि जिस वक्त शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर थे, तब राजनेता सिर्फ दो लोगों से डरते थे। उपर भगवान और नीचे शेषन। वो 12 दिसंबर 1990 से लेकर 11 दिसंबर 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यरत रहे। उनके नाम कई उपलब्धियां जुड़ी हैं। शेषन पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त थे जिन्होंने देश की चुनाव प्रणाली को बदल कर रख दिया। भारत में मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत भी टीएन शेषन के निर्देश और मार्गदर्शन में ही हुआ था। 1996 में उन्हें रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। टीएन शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले 1989 में भारत के 18 वें कैबिनेट सेक्रेटरी के पद पर भी तैनात रह चुके हैं। 1997 में शेषन ने राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था लेकिन के आर नारायण से हार गए।

1999 में शेषन कांग्रेस के टिकट पर बीजेपी के लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। टीएन शेषन ही देश के ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिन्होंने ना तो प्रधानमंत्री पद पर तैनात पी वी नरसिम्हा राव को बख्शा था और ना ही बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर रहे लालू प्रसाद यादव को उनके कार्यकाल के दौरान ही नहीं बख्शा। टीएन शेषन ही पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त थे जिन्होंने बिहार में पहली बार 4 चरणों में चुनाव करवाया था। इस दौरान चारों बार चुनाव की तारीखें बदली गई थी। अपने चुनावी भाषण के दौरान लालू यादव ने कई बार इनके खिलाफ बयानबाजी भी की थी। उन्होंने कई चुनाव रद्द करवाए और बिहार में बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए सेंट्रल पुलिस फोर्स का इस्तेमाल किया। राजनीति के जानकारों की मानें तो वो चुनाव बिहार के इतिहास का सबसे लंबा चुनाव था।

इतना ही नहीं 1992 के उत्तर प्रदेश चुनाव में टीएन शेषन ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों, पुलिस अफसरों और 280 पर्यवेक्षकों से कह दिया था कि एक भी गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही शेषन ने करीब 50,000 अपराधियों को ये विकल्प दिया था कि या तो वो अग्रिम जमानत ले लें या खुद को पुलिस के हवाले कर दें।