रिटायर हो गया भारतीय वायुसेना का ‘बहादुर’ मिग-27, करगिल युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका

भारतीय वायुसेना के इस फाइटर प्लेन ने 1999 में हुए करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद से पायलट इसे 'बहादुर' के नाम से बुलाने लगे। शुक्रवार को अपनी आखिरी उड़ान भरने के बाद ये युद्ध विमान सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिये भी इतिहास बन गया।

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नई दिल्ली: 1999 के करगिल युद्ध में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला वायुसेना का फाइटर प्लेन मिग-27 अब इतिहास बन गया है। शुक्रवार को ये एयरक्राफ्ट वायुसेना के बेड़े से रिटायर हो गया है। शुक्रवार को इसके सात एयरक्राफ्ट का स्कॉड्रन जोधपुर एयरबेस से अपनी आखिरी उड़ान भरी। यहीं से इस विमान ने अपनी पहली उड़ान भी भरी थी। भारतीय वायुसेना की रीढ़ रहे मिग-27 विमान ने तीन दशक से अधिक समय तक अपनी सेवा दी है। 29 स्क्वाड्रन वायुसेना में मिग 27 अपग्रेड विमानों को संचालित करने वाली एकमात्र इकाई है। 29 स्क्वाड्रन की स्थापना 10 मार्च 1958 को वायुसेना स्टेशन हलवारा में ओरागन (तूफानी) विमान से की गई थी।

भारतीय वायुसेना के इस फाइटर प्लेन ने 1999 में हुए करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद से पायलट इसे ‘बहादुर’ के नाम से बुलाने लगे। शुक्रवार को अपनी आखिरी उड़ान भरने के बाद ये युद्ध विमान सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिये भी इतिहास बन गया। क्योंकि अब कोई देश मिग-27 का इस्तेमाल नहीं करता है। जोधपुर में मौजूद मिग-27 का स्कॉड्रन ही आखिरी स्कॉड्रन था। वायुसेना के मुताबिक अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि रिटायरमेंट के बाद इस एयरक्राफ्ट का क्या किया जाएगा। आको बता दें कि आमतौर पर ऐसे विमानों या हथियारों को या तो कहीं स्मारक के तौर पर रख दिया जाता है। या फिर बेस या डिपो को लौटा दिया जाता है। इस शानदार और घातक लड़ाकू विमान को विदाई देने के लिए जोधपुर वायुसेना स्टेशन में एक रस्मी समारोह का आयोजन किया गया।

हालांकि कई बार ऐसा भी देखा गया है कि रिटायर हो रहे विमानों को मित्र देशों को भी दे दिया जाता है। रक्षा प्रवक्ता कर्नल संबित घोष के मुताबित जोधपुर एयरबेस में मिग-27 के दो स्कॉड्रन थे, जिसमें से एक इसी साल रिटायर हो चुका है और यह आखिरी स्कॉड्रन है। इससे पहले हाशिमारा एयरबेस जो कि पश्चिम बंगाल में है,वहां से मिग-27 से दो स्कॉड्रन रिटायर हो चुके हैं। आखिरी उड़ान के बाद जब ये विमान लैंड किया तो इसे अंतिम सलामी दी गई और फिर इसके रिटायरमेंट की घोषणा कर दी गई। रिटायरमेंट की घोषणा के साथ ही इस विमान को भारतीय वायुसेना के बेड़े से अलग कर दिया गया।