ज्योति की फैन हुई इवांका ट्रंप, घायल पिता को साईकिल पर बैठा कर गुरुग्राम से दरभंगा पहुंची थी ज्योति…

भारतीय साइकिलिंग महासंघ ने कहा है कि ज्योति को ट्रायल का मौका देगा। अगर वह सीएफआई के मानकों पर थोड़ी भी खरी उतरती है तो उसे विशेष ट्रेनिंग और कोचिंग मुहैया कराई जाएगी।

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नई दिल्ली: दरभंगा की ज्योति…कौन है ये ज्योति अबतक कोई नहीं जानता था। लेकिन अचानक इस लॉकडाउन में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सामने आई कि एक लड़की अपने साईकिल के पीछे एक अधेड़ उम्र के आदमी को बैठा कर साईकिल चला रही है। साईकिल चलाने वाली यही लड़की ज्योति है जो कामगार रामपाल की तरह ही प्रवासी श्रमिकों के संघर्ष का एक चेहरा बन गई है और अब दरभंगा की इस लड़की की चर्चा अब देशभर में ही नहीं बल्कि अब अमेरिका में भी होने लगा है। क्योंकि इस लड़की के कारनामे पर नज़र पड़ी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की। लॉकडाउन में गुरुग्राम से पिता को साइकिल पर बैठाकर दरभंगा पहुंची ज्योति की खूब चर्चा हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने ट्वीट कर ज्योति की तारीफ की है।

ट्वीट कर इवांका ने कहा, ”15 साल की ज्योति कुमारी ने अपने जख्मी पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई।” इवांका ने आगे लिखा कि सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अगर आप ज्योति के बारे में नहीं जानते हैं तो यहां आपको ये बता दें कि ज्योति पिछले दिनों अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठाकर करीब 1200 किमी से ज्यादा की दूरी 7 दिन में तय करके गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंची। इस दौरान ज्योति ने रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई। ज्योति की तस्वीर जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो इस मुश्किल की घड़ी में भी हर तरफ ज्योति की तारीफ होने लगी है। हर कोई ज्योति के जज्बे को सलाम कर रहा है और अब इस लिस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी इवांका ट्रंप भी शामिल हो गई हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक ज्योति के पिता गुरुग्राम में रिक्शा चलाते थे और एक दुर्घटना के शिकार हो गए। तब ज्योति इनसे मिलने के लिए अपनी मां और जीजा के साथ गुरुग्राम आ गई और पिता की देखभाल के लिए वो यहीं रुक गई। इसी बीच देशभर में कोविड-19 के संक्रमण के कारण पीएम नरेन्द्र मोदी ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी। इसके साथ ही ज्योति के पिता का काम ठप्प पड़ गया। रोजी रोटी के संकट के बीच ज्योति ने पिता के साथ साइकिल पर वापस गांव का सफर तय करने का फैसला किया और करीब 1200 किमी साईकिल चला कर वो दरभंगा स्थित अपने घर पहुंची।

इसके बाद अब भारतीय साइकिलिंग महासंघ ने कहा है कि ज्योति को ट्रायल का मौका देगा। सीएफआई के निदेशक वीएन सिंह ने कहा कि महासंघ उसे ट्रायल का मौका देगा और अगर वह सीएफआई के मानकों पर थोड़ी भी खरी उतरती है तो उसे विशेष ट्रेनिंग और कोचिंग मुहैया कराई जाएगी।