Lockdown 4.0 के लिए गृह मंत्रालय ने राज्यों को ​दिलाई गाइडलाइन की याद, पाबंदियां नहीं घटा सकते…

अब सभी राज्य केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के मानकों के मुताबिक रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन तय करेंगे और इसके हिसाब से ही छूट दे पाएंगे। अभी तक स्वास्थ्य मंत्रालय ही ये चीजें तय करता आया है।

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नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले को देखते हुए केन्द्र सरकार ने अगले 14 दिनों के लिए एक बार फिर लॉकडाउन को 31 मई तक के लिए बढ़ा दिया है। लॉकडाउन के चौथे चरण में सरकार ने ज्यादातर अधिकार राज्यों को दे दिये हैं। हालांकि राज्य सरकारें एक दायरे में ही अपने फैसले ले सकेंगी और यही कारण है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने एक बार फिर राज्यों को पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए गृहमंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि लॉकडाउन के चौथे चरण में भले ही उन्हें राहत दी गई हो लेकिन राज्य सरकार गृह मंत्रालय की गाइडलाइन को दरकिनार कर प्रतिबंधों को कम नहीं कर सकती हैं। आपको बता दें कि राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही इस ओर इशारा किया था कि लॉकडाउन का चौथा चरण नए रंग रूप वाला होगा।

गृह सचिव ने इस संबंध में राज्यों के चीफ सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखी है। पत्र में साफ साफ लिखा गया है कि लॉकडाउन प्रतिबंधों में राज्यों को व्यापक छूट दिए जाने के बाद भी राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों को गृह मंत्रालय की गाइड लाइन के तहत ही प्रतिबंधों को काम करना होगा। इसके साथ ही पत्र में ये भी लिखा गया है कि अगर राज्य चाहें तो कुछ अन्य गतिविधियों पर रोक लगा सकते हैं लेकिन पाबंदियों को घटाया नहीं जा सकेगा।

लॉकडाउन 4.0 में राज्य सरकारों को राज्यों के अंदर दिए जाने वाली छूट की आजादी दी गई है। राज्यों को इस बात को अधिकार दिया गया है कि वह जैसे चाहें अपने हिसाब से दुकानें खोलने से लेकर दूसरी गतिविधियों पर फैसले ले सकती हैं। हालांकि इन फैसलों को लेने के दौरान भी उन्हें केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन करना होगा।

राज्यों को जोन बांटने का मिला अधिकार
लॉकडाउन के चौथे चरण में केंद्र सरकार ने राज्यों को कोरोना मामलों के हिसाब से रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन तय करने का अधिकार दिया है। अब सभी राज्य केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के मानकों के मुताबिक रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन तय करेंगे और इसके हिसाब से ही छूट दे पाएंगे। अभी तक स्वास्थ्य मंत्रालय ही ये चीजें तय करता आया है। यही नहीं कंटेनमेंट जोन से बाहर यात्री वाहन और बसें राज्यों की आपसी सहमति से एक राज्य से दूसरे राज्य में जा सकती हैं। नई गाइडलाइन में गृह मंत्रालय ने इसकी इजाजत दे दी है। लोगों की आवाजाही के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपी), सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरी शर्तों का पालन करना होगा।