दिल्ली में बीजेपी ने खेला बड़ा दांव, 1700 से अधिक कॉलोनियां होंगी नियमित, 40 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के फैसले का असर दिल्ली के 79 गांवों पर पड़ेगा। इन गांवों का शहरीकरण होगा और करीब 1700 से अधिक कॉलोनियां नियमित हो जाएंगी।

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नई दिल्ली: एक तऱफ जहां दिल्ली की केजरीवाल सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा को चुनावी मुद्दा बनाकर लोगों के बीच आने का प्लान कर रही थी कि उसी बीच केन्द्र की बीजेपी सरकार ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए दिल्ली की अनियमित कॉलोनी को नियमित करने के घोषणा कर दी। मोदी कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के विधेयक को मंजूरी दे दी हैं। अब ये विधेयक पास होने के लिये संसद के दोनों सदनों में भेजा जाएगा। उम्मीद ये भी जताई जा रही है कि सरकार इसी शीतकालीन सत्र में ही इस विधेयक को पास कराने के लिए संसद में रख सकती है। अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने की मांग काफी समय से चली आ रही थी, जिसके लिये मसौदा तैयार कर और उसे कैबिनेट की मोहर लगवा कर दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी पहली सियासी चाल चल दी है।

मोदी सरकार के इस फैसले को असर दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। सेन्ट्रल कैबिनेट के इस फैसले से केजरीवाल सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल, आम आदमी पार्टी आने वाली दिल्ली विधानसभा चुनाव शिक्षा और स्वास्थ्य को मुद्दा बनाकर लड़ने का मन बन रहा थी। क्योंकि दिल्ली सरकार ने इस बाबद काम भी काफी किया भी है। चाहे वह सरकारी स्कूलों को मॉर्डन बनाने का काम हो या फिर मोहल्ला क्लिनिक खोलना। आम आदमी पार्टी के नेता इन क्षेत्रों में किए अपने कामों पर ही फोकस करते हैं। इसके साथ ही दिल्ली में 200 किलोवॉट तक बिजली भी मुफ्त कर दी गई। साथ ही पानी फ्री कर दिया गया। दिल्ली के केजरीवाल सरकार के इस काम सराहना हर तरफ हो रही है  लेकिन चुनाव से दो महीने पहले बीजेपी ने अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला करके लोगों को बड़ी राहत दे दी जो दिल्ली के मतदातों के लिए बहुत जरुरी भी था और उम्मीद भी है कि बीजेपी ने इस मुद्दे पर बाजी मार ली है और आम आदमी पार्टी के लिए मुसिबतें थोड़ी और बढ़ा दी है।

Photo: ANI

कुछ समय पहले ही सरकार ने इस बाबत घोषणा करते हुए ड्राफ्ट तैयार करने की बात कही थी। लेकिन सरकार के इस घोषणा के बाद से बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच क्रेडिट लेने की होड़ सी मच गई थी। सरकार के इस फैसले के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का बयान भी आया था कि वो इसके लिए काफी लंबे समय से लड़ाई लड़ रही थी, साथ ही उन्होंने इसके लिए केन्द्र सरकार को धन्यवाद भी दिया था। अरविंद केजरीवाल ने कहा था, “हमने इसके लिए 2015 में प्रस्ताव भेजा था और उसके बाद दिल्ली सरकार लगातार केन्द्र सरकार के साथ संपर्क में भी थी। 24 जुलाई 2019 को हमने इस मसौदे के लिये कई सुझाव भी भेजे थे।

इससे पहले पीएम मोदी ने शुक्रवार को अपने आवास पर आरडब्ल्यूए ऑफिस होल्डर्स के साथ-साथ अनियमित कॉलोनियों में रहने वाले लोगों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि आप लंबे समय से एक अनिश्चितता के माहौल में रहे। कई सरकारों ने इस दिशा में काम किया, लेकिन आधे-अधूरे मन से। हमारी सरकार 2014 में आई, तब से हम दिल्ली में रहने वाले लोगों की मुश्किल का हल निकालने के लिए तरीके खोज रहे थे।

अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के फैसले का असर दिल्ली के 79 गांवों पर पड़ेगा। इन गांवों का शहरीकरण होगा और करीब 1700 से अधिक कॉलोनियां नियमित हो जाएंगी। संसद में विधेयक के पास होते ही इन कॉलोनियों में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों को मालिकाना हक मिल जाएगा। दिल्ली की इन कॉलोनियों में मिडिल व लोअर क्लास तबका रहता है, जो कई सालों से इन कॉलोनियों के रेग्युलराइज होने का इंतजार कर रहा था।

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