राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को मिली मोदी कैबिनेट की हरी झंडी, अब तैयार होगा हर भारतीय का डिजिटल डाटाबेस

कैबिनेट ने भारत की जनगणना 2021 के लिए 8,754.23 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अपडेशन के लिए 3,941.35 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है।

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नई दिल्ली: मंगलवार को हुए मोदी कैबिनेट की बैठाक में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानि एनपीआर को मंजूरी दे दी गई है। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस बात की जानकारी दी। मिली जानकारी के मुताबिक 1 अप्रैल 2020 से सरकार देश की जनसंख्या का नया डेटाबेस तैयार करेगी और खासबात तो ये है कि अब इसके लिये घर घर जा कर नहीं बल्कि बायोमैट्रिक प्रणाली से सरकार इसकी जानकारी ली जाएगी। इसके लिए मोबाइल एप्प के जरिये जनगणना का काम किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक इसके लिए ना तो अब आपसे कोई कागज मांगा जाएगा और ना ही कोई प्रूफ देखा जाएगा बस एक मोबाइल एप्प के जरिये सारी जानकारी इक्कट्ठा की जाएगी।

अपने राज्य में एनपीआर लागू करने के लिए पहले ही पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने इंकार कर दिया है। कैबिनेट ने भारत की जनगणना 2021 के लिए 8,754.23 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अपडेशन के लिए 3,941.35 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है। गृह मंत्रालय इसे लागू कराने के लिए कैबिनेट से 3,941 करोड़ रुपये की मांग भी की थी। प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक 1 अप्रैल से सितंबर 2020 की बीच जनगणना का काम होगा। सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक इसबार जनगणना के लिए देश की जनता को किसी भी तरह के दस्तावेज जमा कराने की जरुरत नहीं होगी। जो भी शख्स इंडिया में रहता है। उसकी गणना होगी और इसके लिए एक विशेष ऐप तैयार किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, एनपीआर को सरकार राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर, जिला, उप जिला औऱ स्थानीय स्तर पर तैयार की जाएगी। इसे तीन चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण का काम 1 अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 के बीच होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर जरूरी आंकड़े जुटाएंगे। दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 तक होगा। इसके बाद तीसरा चरण होगा, जिसमें जुटाए आंकड़ों में जरूरी संशोधन किए जाएंगे।

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