लौटते मानसून से इस साल ली 1685 लोगों की जान, सबसे ज्यादा बिहार और यूपी हुआ प्रभावित

मौसम विभाग की मानें तो जून से लेकर सितंबर के बीच जितनी बारिश हुई, वो बीते 50 सालों की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा है। आंकड़ें बताते हैं कि 1994 के बाद पहली बार इतनी बारिश दर्ज की गई है।

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नई दिल्ली: इस साल मानसून के जो हालात रहे उससे लोगों का राहत नहीं बल्कि जान-माल का नुकसान ही हुआ है। तभी तो जाते जाते भी इस मानसून ने जो कहर बरपाया है ये रोज़ आजकल अख़बार की सुर्खियां बनी हुई है। बिहार सहित पूर्वी उत्तरप्रदेश में भारी तबाही इसी बात के उदाहरण हैं। बिहार की राजधानी पटना और उसके आसपास के इलाकों में लोग आज भी लोग परेशान है। भारी बारिश की वजह से पैदा हुए जलजमाव की समस्या से लोगों को अपने घरों में कैद रहना पड़ा। क्या नेता क्या अभिनेता और क्या आम जनता। जो फिर दो से तीन तीनों तक घर में फंसे हुए थे और उन्हें जब एनडीआरएफ या फिर प्रशासन की टीम ने रिस्क्यू किया तो जनता का दर्द आंसू बनकर आंखों से छलक उठा। हैलिकॉप्टर से लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई।

कहीं नेता बेबस होकर घरों में कैद थे तो कही लोगों से मिलने के दौरान नेता को बहुत मुश्किल से अपनी जान बचानी पड़ी। कोई सोशल मीडिया पर बचाने की गुहार कर रहा था तो कोई बस अपने छत या बालकनी में खड़े होकर फरिश्ते के चमत्कार का इंतजार कर रहा था। अगर देखा जाय तो मानसून का ये कहर पूरे देश में देखा गया। करीब 14 राज्य मानसून के इस क़हर के शिकार बने। सरकारी आंकड़ों में 1685 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। लेकिन ये तो मात्र आंकड़े भर हैं। मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। खैर हमारे देश प्रचलन है कि सरकारी आंकड़ों को ही आधार माना जाता है तो यहां भी सरकारी आंकड़े का ही हवाला दिया जा रहा है। लेकिन वुधवार को एकबार फिर मौसम विभाग की चेतावनी ने लोगों को फिर से ख़ौफज़दा कर दिया है। फिर भारी बारिश के पूर्वानुमान से लोग, प्रशासन और सरकार सभी सतर्क हो गए है।

जैसा कि पहले भी हमने बताया कि 14 राज्यों की जनता को मानसून के क़हर का शिकार होना पड़ा है। जिसमें महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 377, पश्चिम बंगाल में 225, तो वहीं मध्यप्रदेश में 180, गुजरात में 150, बिहार में 130 और कर्नाटक में 105 लोगों की मौत हुई। जबकि इसी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में 22 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया। मौसम विभाग की मानें तो जून से लेकर सितंबर के बीच जितनी बारिश हुई, वो बीते 50 सालों की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा है। आंकड़ें बताते हैं कि 1994 के बाद पहली बार इतनी बारिश दर्ज की गई है। जबकि इस साल मानसून सीजन में ही बिहार, असम, पूर्वी उत्तरप्रदेश में जहां बाढ़ ने कहर बरपाया तो वहीं देश का एक बड़ा हिस्सा सूखे की ज़द में रहा।

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