मोदी और पवार के बैठक के बाद बदल सकता है महाराष्ट्र का राजनीतिक समीकरण, एनसीपी को मिल सकती है मोदी केबिनेट में जगह

मंगलवार को कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से उनके मुलाकत के बाद उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर सोनिया जी से उनकी कोई बात नहीं हुई है ।

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नई दिल्ली: दिल्ली में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और एनसीपी चीफ शरद पवार के बीच बैठक हुई तो दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक की राजनीति में हलचल शुरु हो गई। कयासों का बाज़ार गर्म हो गया। प्रदेश में सरकार के गठन को लेकर जो गतिरोध चल रहा है, उस बीच दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बैठक होना कई तरह के राजनीतक समीकरण बदलने के संकेत भी हो सकते हैं। बैठक खत्म होने के बाद से खबरें आने लगी कि हो सकता है कि महाराष्ट्र में बीजेपी-एनसीपी की सरकार बने। कयास ये भी लगाये जाने लगे कि महाराष्ट्र से लेकर केन्द्र की मोदी सरकार में एनसीपी को अहम मंत्रालय दिया जा सकता है। साथ ही खबर ये भी है कि 2022 में शरद पवार को राष्ट्रपति पद भी ऑफर हो सकता है।

पिछले कुछ समय से शरद पवार के कुछ बयानों से भी ऐसा लग रहा है कि मानों एनसीपी बीजेपी से हाथ मिलायेगी। वहीं मंगलवार को कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से उनके मुलाकत के बाद उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर सोनिया जी से उनकी कोई बात नहीं हुई है जबकि इस सोनिया-शरद मुलाकात से पहले यही बात कही जा रही थी कि महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण के बाद सोनिया और शरद की ये मुलाकत सरकार गठन को लेकर अहम हो सकता है। लेकिन शरद पवार के बयान ने सारे कयासों से पर्दा उठा दिया। लेकिन ठीक इसके एक दिन बाद पीएम मोदी और शरद पवार के इस मुलाकत के बाद फिर से एक नए राजनीतिक समीकरण और कयासों में बदलाव का दौर शुरु हो गया है।

वहीं दूसरी तरफ पीएम नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में एनसीपी के अनुशासन के तारीफ ने फिर कयासों की आग को हवा दे दिया है। हालांकि इसके बाद से ही सियासी हलकों में नए समीकरण को लेकर तरह तरह की चर्चाएं शुरु हो गई थी। वहीं अब बातें ये भी उटने लगी है कि अगर महाराष्ट्र में बीजेपी और एनसीपी ने साथ मिलकर सरकार बनाई तो 2022 में शरद पवार को राष्ट्रपति पद बतौर उपहार ऑफर हो सकता है। क्योंकि तात्कालिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 2022 में समाप्त होने जा रहा है हालांकि एनसीपी चीफ शरद पवार ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसानों के मुद्दों को लेकर पीएम मोदी के साथ एक औपचारिक मुलाकात है, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसे राजनीतिक हालात के बीच दोनों बड़े नेताओं की ये मुलाकात कई मायनों में खास माना जा रहा है।

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