प्याज के दामों में बढ़ोतरी के लिए नाफेड ने मानसून को बताया ज़िम्मेदार, 15-20 दिन के बाद कीमत हो सकते हैं सामान्य

नाफेड के मुताबिक हर साल ये बफर स्टॉक 10 हजार टन का होता था लेकिन इस साल बारिश का हाल देख पहले ही इसका स्टॉक पांच गुना किया गया। खास बात ये है कि सिर्फ रबी की फसल वाले प्याज को ही बफर स्टॉक में 4 महीने तक रखा का सकता है, खरीफ के प्याज को नहीं।

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नई दिल्ली: देशभर में लोगों के किचन से प्याज लगभग ख़त्म हो गया है। देश के कई हिस्सों में प्याज 100 रुपये प्रतिकिलो के पार पहुंच गया है और नाफेड के मुताबित अब करीब 15 से 20 दिन और प्याज रुलाने वाला है। नाफेड ने प्याज की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के लिए मानसून को जिम्मेदार माना है। नाफेड के निदेशक अशोक ठाकुर के मुताबिक मानसून में भारी बारिश हुई है उसके कारण बहुत सारी फसल बर्बाद हुई है। इसके अलावा बहुत जगह बुवाई तक नहीं हो पाई, इसके कारण प्याज का उत्पादन कम हुआ। इसी कम प्याज के उत्पादन के चलते ही दामों में इतना उछाल आया है।

नाफेड के मुताबिक सबसे ज्यादा प्याज की फसल को नुकसान महाराष्ट्र में हुआ है। नाफेड के निदेशक अशोक ठाकुर के मुताबिक प्याज की कीमतों में कमी आने में 15 से 20 दिनों का वक्त लग सकता है। नाफेड के मुताबिक मंडी में अभी इतनी प्याज नहीं है जितनी हर साल होती है। वहीं दूसरी तरफ अभी खरीफ की फसल आना शुरू नहीं हुई है। नाफेड को उम्मीद है अगले 10 दिनों में कुछ राज्यों से प्याज की फसल मंडी पहुंचना शुरू हो जाएगी। इसके अलावा केंद्र ने जो आयात करवाया है वो प्याज भी पहुंच जाएगी जिसके बाद दम समान्य हो जाएंगे।

नाफेड ने पिछले महीने अपने बफर स्टॉक से 13 राज्यों और केंद्र को प्याज दिया था ताकि लोगों को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराया जा सकें। नाफेड का कहना है कि पिछले महीनों में उसने 57 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा प्याज दी। जिसमें नाफेड ने..

  1. मदर डेयरी को 7397.38 मीट्रिक टन
  2. नाफेड ने अपने आप बेचा 215.65 मीट्रिक टन
  3. दिल्ली को 1205.2 मीट्रिक टन
  4. आजादपुर मंडी को 5249 मीट्रिक टन
  5. केंद्र को और केंद्रीय भंडार को 123 मीट्रिक टन
  6. पश्चिम बंगाल को 3585.65 मीट्रिक टन
  7. कर्नाटक को 640 मीट्रिक टन
  8. केरल को 466 मीट्रिक टन
  9. आंध्र प्रदेश को 312 मीट्रिक टन
  10. राजस्थान को 392 मीट्रिक टन दिया है.

नाफेड के मुताबिक हर साल ये बफर स्टॉक 10 हजार टन का होता था लेकिन इस साल बारिश का हाल देख पहले ही इसका स्टॉक पांच गुना किया गया। खास बात ये है कि सिर्फ रबी की फसल वाले प्याज को ही बफर स्टॉक में 4 महीने तक रखा का सकता है, खरीफ के प्याज को नहीं। वही नाफेड ने इस बात की भी दावा किया है कि इजिप्ट और अफगानिस्तान से इम्पोर्ट किया हुआ प्याज भारत में पहुंचना शुरू हो चुका है। वहीं भारत सरकार द्वारा मंगवाए प्याज भी जल्द आ जाएंगे। मिली जानकारी के मुताबित एमएमटीसी ने भी तुर्की से प्याज मंगवा रही है। इसके अलावा राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों से प्याज आना शुरू हो जाएगा। अगर इतनी जगहों से प्या आने शुरु हो जाएंगे को प्याज की कीमतों में कमी आनी शुरु ह जाएगी। फिलहाल नाफेड के पास बफर स्टॉक के नाम पर कोई प्याज नहीं बची है। नाफेड की बफर स्टॉक की प्याज पिछले महीने ही खत्म हो गई है।

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