निर्भया गैंगरेप मामले में दोषियों को दया याचिका के लिए मिले 7 दिन, फांसी के लिए जारी हो सकता है ब्लैक वारंट

जेल सूत्र के मुताबिक इन चारों को तिहाड़ जेल अधीक्षक की तरफ से हिंदी और अंग्रेजी में नोटिस दिया गया है। साथ ही उन्हें नोटिस पढ़कर भी सुनाया गया है। इसके साथ ही इनसे उन्हें नोटिस तामील किए जाने की रिसिविंग भी ली गई है।

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नई दिल्ली: तिहाड़ जेल प्रशासन ने निर्भया गैंगरेप के 4 दोषियों को राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने के लिए 7 दिनों का वक्त दिया है। नोटिस के ये अवधि 4 नवंबर को खत्म हो जाएगी और अगर दोषियों ने इस अवधि के अंदर दया याचिका नहीं डाली तो तिहाड़ प्रशासन निचली अदालत के इसकी सूचना देकर सभी को फांसी देने के लिए ब्लैक वारंट लेने की कार्रवाई शुरु कर सकता है। तिहाड़ प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि अगर चारों दोषियों को फांसी की सजा के खिलाफ राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करनी है तो 7 दिनों के भीतर कर दें, नहीं तो तिहाड़ जेल प्रशासन निचली कोर्ट को सूचित करेगा और फांसी के लिए ब्लैक वारंट लेने की कार्रवाई करेगा।

हालांकि दोषियों ने निचली अदालत के फांसी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए फांसी की सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इनके पास बस एक ही विकल्प बचा था कि राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करे। लेकिन पिछले एक साल के भीतर दोषियों ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल नहीं की। लेकिन अब तिहाड़ प्रशासन ने सभी चारों दोषियों को एक हफ्ते का वक्त दिया है।

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आपको बता दें कि निर्भया गैंगरेप मामले में कुल 6 दोषी हैं। इनमें से एक दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जबकि दूसरे दोषी को नाबालिग होने के चलते जुवेनाईल कोर्ट से तीन साल की सजा हुई थी। बांकी के चार आरोपी अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं जिन्हें लोअर कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। चारों दोषियों में से अक्षय और मुकेश जेल नंबर दो में बंद है. जबकि विनय कुमार जेल नंबर चार में बंद हैं। वहीं चौथा आरोपी पवन मंडोली जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में बंद है। जेल सूत्रों के मुताबिक, जब जेल प्रशासन ने इनसे पूछा कि उन्होंने दया याचिका क्यों नहीं लगाई? तो उन्होंने कहा कि वो ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं औऱ उन्हें नहीं पता है कि क्या कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

जेल सूत्र के मुताबिक इन चारों को तिहाड़ जेल अधीक्षक की तरफ से हिंदी और अंग्रेजी में नोटिस दिया गया है। साथ ही उन्हें नोटिस पढ़कर भी सुनाया गया है। इसके साथ ही इनसे उन्हें नोटिस तामील किए जाने की रिसिविंग भी ली गई है। आपको बता दें कि नियमों के मुताबिक, फांसी की सजा की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लगाई जा सकती है और राष्ट्रपति दया याचिका पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से राय लेते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बाबत अपनी राय लिखित में राष्ट्रपति भवन को देता है और यदि केंद्रीय गृह मंत्रालय अपनी राय में यह जाहिर करता है कि सजा पाया गया व्यक्ति फांसी पर चढ़ाने योग्य है तो राष्ट्रपति दया याचिका ठुकरा सकते हैं।

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