जानिए क्या है राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और भारत के लिए क्यों जरुरी है ये?

केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक इसके लिए ना तो अब आपसे कोई कागज मांगा जाएगा और ना ही कोई प्रूफ देखा जाएगा बस एक मोबाइल एप्प के जरिये सारी जानकारी इक्कट्ठा की जाएगी।

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नई दिल्ली: मंगलवार को हुए मोदी कैबिनेट की बैठाक में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानि एनपीआर को मंजूरी दे दी गई है। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस बात की जानकारी दी। मिली जानकारी के मुताबिक 1 अप्रैल 2020 से सरकार देश की जनसंख्या का नया डेटाबेस तैयार करेगी। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक इसके लिए ना तो अब आपसे कोई कागज मांगा जाएगा और ना ही कोई प्रूफ देखा जाएगा बस एक मोबाइल एप्प के जरिये सारी जानकारी इक्कट्ठा की जाएगी।

एनपीआर क्या है?

  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर  यानि एनपीआर के जरिए सरकार देश के हर नागरिक की जानकारी रख सकेगी।
  • वैसे निवासी जो 6 महीने या उससे ज्यादा समय से भारत के किसी क्षेत्र में रह रहा है, उसके लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाएगा।
  • इसके तहत हर भारतीय नागरिक का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड लिया जाएगा और उनकी वंशावली भी दर्ज की जाएगी।
  • एनपीआर को सरकार राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर, जिला, उप जिला व स्थानीय स्तर पर तैयार करेगी।
  • एनपीआर तीन चरणों में तैयार किया जाएगा – पहला चरण एक अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 के बीच होगा। दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 तक होगा. इसके बाद तीसरा चरण होगा, जिसमें जुटाए आंकड़ों में जरूरी संशोधन किए जाएंगे।
  • इसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर जरूरी आंकड़े जुटाए जाएंगे।

क्यों जरूरी है एनपीआर?

  • एनपीआर का मूल उद्देश्य देश के हर निवासी की पहचान के लिए एक विस्तृत आंकड़ा तैयार करना है. इसमें हर निवासी की जनसांख्यिकी जानकारी के साथ-साथ उनका बायोमेट्रिक भी दर्ज रहेगा।
  • इसका मकसद है देश के सभी नागरिकों को एक साथ जोड़ा जा सके।
  • सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और व्यक्ति की पहचान की जा सके।
  • नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के द्वारा देश की सुरक्षा में सुधार किया जा सके और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में सहायता प्राप्त हो सके।
  • आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए अंतिम बार साल 2010 में आंकड़े जुटाए गए थे. जब 2011 के लिए जनगणना की जा रही थी।
  • इन आंकड़ों को फिर साल 2015 में अपडेट किया गया था। इसके लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण हुए थे। उन आंकड़ों को डिजिटल करने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
  • अब सरकार ने ये फैसला लिया है कि 2021 जनगणना के दौरान असम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए इन आंकड़ों को फिर से अपडेट किया जाएगा।
  • इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा एक राजपत्रित अधिसूचना पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है।

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