NIC को नहीं पता आरोग्य सेतु ऐप किसने बनाया, सूचना आयोग ने मंत्रालय सहित कई लोगों को भेजा नोटिस

सामाजिक कार्यकर्ता ने ऐप के शुरुआती प्रस्ताव, इसको मिली मंजूरी की डिटेल्स, इस काम में शामिल कंपनियों, व्यक्ति और सरकारी विभागों को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने ऐप डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के बीच हुए सूचना के आदान-प्रदान की प्रतियां भी मांगी थीं। हालांकि उनका आवेदन दो महीनों तक अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच घूमता रहा।

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नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण के दौरान लोगों के अंदर जागरुकता और सुरक्षा के लिहाज से केन्द्र सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च किया था। जिसे हर स्मार्ट फोन यूजर्स ने अपने फोन में डाउनलोड किया और वो भी इसलिए कि उस ऐप के बिना ना तो आप हवाई सफर कर सकते हैं और ना ही किसी सार्वजनिक जगहों पर घुम नहीं सकते थे। लेकिन अब यही ऐप अब विवादों में घिरता नज़र आ रहा है। अब ये विवाद इसबात को लेकर हुआ है कि इस ऐप को बनाने का दावा करने वाली संस्थान नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर को अब इस बात का पता ही नहीं है कि इस ऐप्प को किसने बनाया है। दरअसल केंद्रीय सूचना आयोग ने मंगलवार को नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (NIC) से जवाब मांगा है कि जब आरोग्य सेतु ऐप के वेबसाइट पर उनका नाम है, तो फिर उनके पास ऐप के डेवलपमेंट को लेकर को डिटेल क्यों नहीं है? आयोग ने इस संबंध में कई चीफ पब्लिक इन्फॉर्मेशन अधिकारियों (CPIOs) सहित नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और NIC को कारण बताओ नोटिस भेजा है।

इस नोटिस में उनसे सफाई मांगी गई है कि उन्होंने करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल की जा रही इस कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप को लेकर डाली गई एक आरटीआई आवेदन का स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया है? दरअसल, कोरोनावायरस के बीच कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार की ओर से आरोग्य सेतु ऐप को बढ़ावा दिया गया है। अब चूंकि आरोग्य सेतु ऐप की वेबसाइट कहती है कि इसे नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर और आईटी मंत्रालय ने डेवलप किया है, लेकिन इस ऐप को लेकर डाली गई एक आरटीआई में दोनों ने कहा है कि उनके पास इसकी जानकारी नहीं है कि इस ऐप को किसने डेवलप किया है। अब सूचना निकाय ने सरकार के ‘गोलमोल जवाब’ पर नोटिस भेजा है।

आयोग ने कहा है कि ‘अधिकारियों द्वारा सूचना देने से इनकार किए जाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।’ आपको बता दें कि एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सूचना आयोग के पास शिकायत दी थी कि ऐप के डेवलपमेंट को लेकर कई मंत्रालय स्पष्ट सूचना देने में असफल रहे थे। सूचना आयोग ने सभी संबंधित इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा है कि आखिर ‘सूचना देने में रुकावट पैदा करने’ और आरटीआई आवेदन पर ‘गोलमोल जवाब देने’ के आरोप में उनपर एक्शन क्यों न लिया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ता ने ऐप के शुरुआती प्रस्ताव, इसको मिली मंजूरी की डिटेल्स, इस काम में शामिल कंपनियों, व्यक्ति और सरकारी विभागों को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने ऐप डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के बीच हुए सूचना के आदान-प्रदान की प्रतियां भी मांगी थीं। हालांकि उनका आवेदन दो महीनों तक अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच घूमता रहा। कथित रूप से NIC ने बार-बार कहा कि ‘ऐप के क्रिएशन से जुड़ी पूरी फाइल सेंटर के पास नहीं है।’ आईटी मंत्रालय ने फिर यह आरटीआई नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन को भेज दिया, जिसने कहा कि ‘जो सूचना मांगी गई है, वो उनके विभाग से जुड़ा हुआ नहीं है।’