दिल्ली सरकार की मुफ्त स्कीमों से निकला दिवाला, राजकोषीय घाटा 55 गुना बढ़ा, 1750 करोड़ के घाटे में डीटीसी

वित्तिय वर्ष 2019-20 में पेश किये गए दिल्ली सरकार के वजट में 5,902 करोड़ का राजकोषिय घाटा अनुमानित है जो साल 2018-19 के अनुमान से 5,213 करोड़ रुपये अधिक है।

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नई दिल्ली: दिल्ली में एकबार फिर आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड तरीके से चुनाव जीत कर फिर से सत्ता पर काबिज़ हो गई है। इसकी एक बड़ी वजह रही दिल्ली सरकार की कुछ फ्री की स्कीमें। लेकिन इसकी वजह से दिल्ली सरकार के सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचा है इसके बारे में शायद अभी तक किसी ने नहीं सोचा। मुफ्त बिजली, पानी और महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा के दम पर दिल्ली की सत्ता पर फिर से काबिज होने वाले अरविंद केजरीवाल सरकार कैसे चलाएंगे अब इसपर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि पिछले दो साल में दिल्ली का राजकोषिय घाटा 55 गुना बढ़ गया है। वित्तिय वर्ष 2019-20 में पेश किये गए दिल्ली सरकार के वजट में 5,902 करोड़ का राजकोषिय घाटा अनुमानित है जो साल 2018-19 के अनुमान से 5,213 करोड़ रुपये अधिक है।

जैसा की आपको ज्ञात होगा कि चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल सरकार ने मुफ्त बिजली और डीटीसी बस यात्रा की घोषणा की थी। बात करें डीटीसी बसों की तो ये बस दिल्ली सरकार के अधिन आती है और इसके हालात भी खास्ता ही हैं। दिल्ली विधानसभा के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के मुताबिक दिल्ली परिवहन निगम यानि डीटीसी का घाटा 1750.37 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। इस रिपोर्ट में इसबात का ज़िक्र किया गया कि डीटीसी नुकसान में चल रही है। साल 2013-14 में डीटीसी का घाटा 942.89 करोड़ रुपये था जो साल 2014-15 में बढ़कर 1019.36 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 2015-16 में ये घाटा 1381.79 करोड़ पर पहुंच गया और फिर 2016-17 में डीटीसी का कामकाजी घाटा 1730.02 करोड़ रुपया दर्ज किया गया।

साल 2018-19 में बजटीय अनुमानों में डीटीसी का घाटा 1750.37 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। आपको ये बता दें कि साल 2010-11 तक दिल्ली सरकार डीटीसी के कामकाजी घाटे को पूरा करने के लिए कर्ज दिया करती थी लेकिन केजरीवाल सरकार में ये बंद कर दिया गया और सरकार ने अनुदान देने की प्रणाली शुरु कर दी। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों पर एक नज़र डाले तो 2013-14 में डीटीसी बसों के बेड़े में एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई जो 2013-14 में 5,223 से गिरकर 2017-18 में 3,951 पर पहुंच गई है। वहीं बात करें राइडरशिप की तो 2016-17 में 31.55 लाख से गिरकर 2017-18 में 29.86 लाख पर पहुंच गई है। मुफ्त स्कीम जनता को लाभ पहुंचाने के लिए होता है लेकिन उस मुफ्त स्कीम का क्या करें जब एक सरकारी संस्थान इन मुफ्त स्कीम की वजह से लगातार घाटे में जा रहा होता है। यहां तो दिलचस्प बात ये है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने डीटीसी को घाटे से उबारने के बजाय महिलाओं को मुफ्त यात्रा योजना लागू कर डीटीसी को दिवालिया बनाने के अभियान में लग गई है।